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Kisan News – ख़रीदा जा रहा था 14 रू लीटर दुग्ध, किसानो ने विरोध में बहाया सड़को पर दुग्ध।

हमारे देश की ज्यादातर जनता कृषि पर निर्भर रहती है। परंतु उनका सुनने वाला कोई नहीं है। जैसा हम जानते है कि अभी कोरोना महामारी

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के कारण भारत के किसानों की हालत बिल्कुल ठीक नहीं है। उनमें वे छोटे किसान जो दूध बेचकर अपना गुजारा करते है, वे अत्यधिक परेशान है। इसलिए सही दाम नहीं मिलने के कारण किसानों ने रास्ते में दूध बहाया और प्रदर्शन भी किया।

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दूध उत्पादक : कोरोनावायरस के कारण सभी असुविधा में है। जहां इसको रोकने के लिए लगातार लॉकडॉउन भी जारी है। हालत अब ये है कि दूध उत्पादक किसान निराश हो चुके है। और अब एक लीटर दूध की कीमत 14 रूपया हो चुका है। आपको बता दे बाज़ार में बिक रही बोतल बंद पानी की कीमत भी इससे ज्यादा होती है।और सिर्फ एक जगह नहीं बल्कि हर जगह के किसान परेशान है।

खेती के साथ जो दूध बेचने का काम करते थे उनमें कुछ किसानों ने कहा है कि लॉक डाउन से उन्हें बहुत असर पड़ा ,है जिससे उन्हें धक्का भी लगा है। उनका कहना है कि जहां लॉकडाउन से पहले तक गाय का दूध 30 से 32 तक बिकती थी। अब लॉक डाउन के कुछ दिन बाद कीमत में बहुत जल्दी गीरावट आईं। और अब मुश्किल से ही 14 रुपए लीटर में बिक रहा है। लॉकडाउन कि वजह से दूध विक्रेता को बहुत असर हुआ है। क्योंकि एक तो उन्हें दूध की सही कीमत नहीं मिलती और दूसरा उनका लागत बढ़ता जा रहा है, और जो दूध हो रहा उसको खरीदने वाला कोई क्रेता नहीं है।

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लॉक डाउन के पहले कुछ किसान खुद शहरों में जाकर दूध देकर आते थे। लेकिन अब वह फ्री में दे रहे और उनको अपनी कीमत भी सही नहीं मिल रही है। जिससे बहुत दिक्कत हो रही है। कुछ किसानों का कहना है कि उनके द्वारा पहले कि तुलना में अभी कम दूध बिक रहे है। जिससे उनकी चिंता बढ़ गई है। सिर्फ यही नहीं लगातार लॉक डाउन से वे अपने जानवरों को लेकर चिंतित हो गए है, जहां उन्हें अब उनके चारे की चिंता सता रही है। क्योंकि इनकी भी दाम में बढ़ोतरी हो गई है।

इसलिए कुछ किसानों ने निवेदन किया है, की जानवरों के चारे का कोई इंतजाम किया जाए। हरियाणे के एक किसान का कहना है कि पहले वो गाय की दूध 45 रुपए में बेचते थे और भैंस की दूध 60 रुपए में बेचते थे परंतु अब वह दाम नहीं रहा जिससे उनको भी भारी मात्रा में नुकसान हो रहा है। और सारे जगह बंद होने से आधा दूध बिक रहा है और आधा नहीं बिक रहा है। आपको बता दें छोटे किसानों को प्रतिदिन के हिसाब से पैसा चाहिए होता है। और अब इस महामारी में उन्हें बहुत असर पड़ा है।

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लॉक डॉउन की वजह से दूध के उत्पादन की लागत बढ़ गईं है। और यही नहीं चारा और दूध की कीमत भी सही नहीं चल रही जिससे सबके माथे में हाथ आ चुका है।एक बात यह भी है कि लॉक डाउन से पहले देश में दूध की कीमत अच्छी नहीं मिल रही थी। केंद्र सरकार की वेबसाइट डाटा डॉट जीओवी डॉट इन ने 2018 में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की एक रिपोर्ट में  प्रकाशित किया था कि दूध की कीमत फैट के आधार पर तय की जाती है। जिसमे भैंस का दूध अधिक महंगा हो क्योंकि उसमे फैट की मात्रा ज्यादा है।

जैसा हमने कहा है, पूरी दुनिया में भारत सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। परंतु खबरें आती है, कि देश का डेयरी उत्पाद संकट के कटघरे में है। हालंकि केंद्र सरकार ने विज्ञप्ति के द्वारा इसे झूठ भी साबित किया है। आपको बताऊं इसमें कहा गया था कि कोऑपरेटिव मिल्क यूनियन जिसमे 6 फीसदी फैट और 9 फीसदी एसएनएफ है वो दूध 48 से 56 रुपए प्रति लीटर में बिक रहा। और आगे किसानों को भी 29 से 39 रुपए प्रति लीटर दिया जा रहा है। जिसमे ज्यादातर दूध कंपनियां उपभोक्ताओं से होनी वाली इस कमाई को 60 से 80 फीसदी उत्पादनकर्ता को दे रही हैं जो सबसे ज्यादा दुनिया में है। इसके बाद सालाना बोनस भी इनको दिया जाता है। डेयरी कॉपरेटिव से जुड़े किसानों की संख्या की वृद्धि भी हो रही है। 201516 में 15.84 लाख किसान थे जिसमे 2017-18 में 16.57 लाख की वृद्धि हुई हैं। दूध की कीमत सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं किया जाता है। ऐसे में यह कहना गलत है कि किसान डेयरी का काम को छोड़कर दूसरी तरफ शिफ्ट हुए।

आपको बता दें कहा जा रहा है कि देश की कंपनियां इसमें मुनाफा कमा रही है। जहां एक तरफ इनको नुक़सान हो रहा है वह यह अफ़वाह भी आ रही है कि खुले दूध से कोरोनावायरस का संक्रमण फैल रहा है। इनमे जो किसान गांव या प्राइवेट डायरी में दूध बेचने का काम करते है उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान देखना पड़ रहा है। ऐसे में कहा जा रहा है कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए इसे ठीक करना बेहद जरूरी है। और सरकार को इनके लिए कुछ करना चाहिए। भारत में 28लाख करोड़ रुपया का कृषि उत्पादन होता है। जिसमे 25% यानी लाख करोड़ दूध के उत्पादन के लिए जाता है। पैसे के अनुसार देखे तो दूध देश की सबसे बड़ी फसल है। इसमें गेहूं और चावल से ज्यादा देश में दूध का मूल्य ज्यादा है। और तो और गन्ने के फसल के मूल्य से 7 गुना ज्यादा दूध का उत्पादन किया जाता है। जहां शादियों का मौसम हो या कोई अन्य उत्सव दूध की मांग रहती है परंतु इस लॉक डाउन के कारण सब ठप पड़ा हुआ है, जिससे बाज़ार में और किसानों को नुक़सान हो रहा है।

जहां देश में सबसे बड़ी दुग्ध उत्पाद सहकारी संस्था गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ लिमिटेड (अमूल) के प्रबंध निदेशक ने कहा है कि किसानों को मदद करने को लेकर ही प्राइवेट कंपनियां ने पहले की तुलना में ज्यादा दूध की खरीदारी कर रही हैं। हाल में हुए एक मीटिंग में बताया गया है कि वे ज्यादा से ज्यादा दूध खरीदने का प्रयास कर रहे। अमूल जो भी दूध दूसरे राज्यों से लेता है उसमें 80 फीसदी की वृद्धि हुई है। वहीं होटल और मिठाई की दुकान आदि के बंद होने से दूध की खपत कम हुई इसका नुकसान भी उन किसानों को हो रहा है जो कॉपरेटिव को दूध नहीं बेच पा रहे हैं। आपको बता दूं जहां जहां कॉपरेटिव की अच्छी स्थिति हैं वहां के किसानों को किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है। जैसे गुजरात और राजस्थान का उदाहरण सही रहेगा।

Content Creator – Aishwarya Sinha

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