Provident Fund – दो साल के लिए प्रोविडेंट फंड के इस नियम को बंद करने की मांग उठाई जा रही है, जानिए क्यों !

कोरोना वायरस के कारण से दुनियाभर मे हुए लाॅकडाउन से रोज़गार पहले पैमाने पर नही आ पाया है । हालांकि, अनलाॅक के बाद रोज़गार एवं मार्केट खुला तो, परंतु काम नहीं हो रहा है । ये सब को देखते हुए जो छोटे कारोबार है तो उनके यहां एवं स्टोर मे स्टाफ़ की भी भारी कमी हो गई है ।

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परंतु भविष्य निधि संगठन से सम्बन्धित कुछ रुल्स ऐसे भी है, जिनसे इन्हे परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है । इसी बात को मद्दे नजर रखते हुए इन्होंने केन्द्रीय श्रम एवं संतोष गंगवार जो कि रोजगार मंत्री है उनके ओर से पीएफ़ कानून ( PF धारा ) 1952 की एक्ट 1 ( 5 ) को न्यूनतम 2 वर्षो के लिए निलंबित रखने का मांग की है ।

छोटे व्यापारियों के ज्यादा से ज्यादा स्टाफ़ रोजगार छोड़ चुके हैं !

सबसे पहले आपको वी के बंसल कौन है इसकी जानकारी देते है तो व्यापारिक संगठन फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया रोज़गार मंडल के महासचिव है । तो वी के बंसल का यह मानना है की लगातार मार्केट बंदी और इकोनोमिकल मे आई इस कमी के कारण छोटे व्यापार करने वाले व्यक्ति की प्रोफेशनल गतिविधियों को बहुत हद तक स्थगित कर दिया गया है । इन छोटे व्यापार करने वाले व्यक्ति के अतिरिक्त स्टाफ़ रोज़गार छोड़ कर अपने मूल जगह पर चले गए हैं ।

भविष्य निधि कानून के एक्ट 1 ( 5 ) के प्रावधान के मुताबिक अगर किसी भी स्थापना मे स्टाफ़ की अंक 20 तक पहुंचा है तो उस पीएफ़ विभाग मे रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी हो जाता है । परंतु आपके जानकारी हेतु बता दें कि अगर वहां स्टाफ़ की संख्या 20 से कम भी हो जाता है तो विभाग पीएफ़ रजिस्ट्रेशन को खुद को समर्पण नहीं कर सकता है ।

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इस प्रावधान से प्राप्त हुए छुट ! 

फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया रोज़गार मंडल ने यह जानकारी साझा किया है कि इस मौजूदा वक्त मे कारोबारी स्थापना मे स्टाफ़ की अंक 20 से बहुत कम हो गई है । परंतु पीएफ़ कानून के अनुसार वो पीएफ़ का रजिस्ट्रेशन सरेन्डर नहीं कर सकता है । इसी वजह से इस विषय मे रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार को एक आवेदन पत्र लिख कर पीएफ़ कानून की एक्ट 1 ( 5 ) की प्रावधान का कम से कम मान लीजिए 2 वर्श के लिए निलंबित करने की मांग किया है ।

अपने आवेदन पत्र मे फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया रोज़गार मंडल ने यह लिखा है कि पहले वे छोटे व्यापारियों, जिनकी स्टाफ़ की संख्या 20 से ज्यादा थी, पीएफ़ के रुल्स का आनंद से पालन किया करते हैं । परंतु लाॅकडाउन एवं मार्केट बंदी के बाद कारोबारी स्थापना मे स्टाफ की संख्या मे भारी कमी आई है ।

इस वक्त रुल्स का पालन करना मुश्किल !

फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया रोज़गार मंडल का यह कहना है कि अभी मौजूदा परिस्थिति मे तरह तरह के श्रम क़ानूनों के रुल्स का पालन करना बहुत कठिन हो गया है । सख्त कानून से बचाव करने के लिए व्यापारी और छोटे व्यापारियों का रोज़गार बंद करना ही सही समझ रहे हैं । वैसे इससे कारोबार की स्थिति और खराब हो गया है।

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